मुजफ्फरनगर दंगा : कोर्ट ने यूपी के मंत्री सहित 25 भाजपा नेताओं पर से केस वापस लेने को मंज़ूरी दी

वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 25 भाजपा नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ दायर मुकदमा वापस लेने की अभियोजन पक्ष (प्रॉसीक्यूशन) की याचिका को स्वीकार कर लिया है।

केस से राहत पाने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं कपिल देव अग्रवाल (उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री),  संजीव बालियान (पूर्व केंद्रीय मंत्री), सुरेश राणा (पूर्व राज्य मंत्री), अशोक कटारिया (पूर्व राज्य मंत्री), भारतेन्दु सिंह और सोहनवीर सिंह (पूर्व बीजेपी सांसद)। iइसके अलावा अशोक कंसल और उमेश मलिक (पूर्व बीजेपी विधायक), साध्वी प्राची (विश्व हिंदू परिषद की नेता) और यति नरसिंहानंद (प्रमुख डासना शिव मंदिर) भी शामिल हैं। इसमें यति नरसिंहानंद ही बीजेपी में नहीं है। लेकिन उनकी गतिविधियां, बयानबाज़ी बीजेपी और आरएसएस के माफिक है।

2013 का मुजफ्फरनगर दंगे ने पश्चिमी यूपी में किसान राजनीति के सबसे अहम फैक्टर जाट-मुस्लिम एकता को छिन्न-भिन्न कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत सिंह आज बीजेपी के साथ हैं।

मुजफ्फरनगर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र कुमार फौजदार ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर केस वापसी की अर्जी को मंजूरी दी। अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह ने इस फैसले की पुष्टि की।

यह मामला 31 जुलाई 2013 को मुजफ्फरनगर के नंगला मंदोर गांव में आयोजित एक महापंचायत से संबंधित है। आरोप था कि उक्त नेताओं ने: निषेधाज्ञा (धारा 144) का उल्लंघन किया, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा पहुंचाई और महापंचायत में भड़काऊ भाषण देकर सांप्रदायिक तनाव भड़काया।

अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले को “जनहित” और “कानूनी प्रक्रियाओं के तहत” वापस लेने का निर्णय लिया था, जिसके बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत में केस वापस लेने की अर्जी दाखिल की थी। अदालत ने मामले के तथ्यों और राज्य सरकार की याचिका पर विचार करते हुए केस वापसी की अनुमति दे दी।

वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में हुए भीषण सांप्रदायिक दंगों में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।

2013 में मुजफ्फरनगर दंगा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे दर्दनाक हिंसात्मक घटनाओं में से एक है। विवाद एक छेड़छाड़ की घटना से हुआ, जिसने फर्जी खबरों, राजनीतिक ध्रुवीकरण और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया।

2014 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की। दंगों ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सभी मुख्य सीटों (मुजफ्फरनगर, कैराना, बागपत, मेरठ, बिजनौर आदि) पर बीजेपी उम्मीदवारों को एकतरफा जीत मिली। 

मुजफ्फरनगर दंगों का राजनीतिक असर 2014 तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर भी इसका गहरा प्रभाव देखा गया। भाजपा ने 300 से अधिक सीटें हासिल कीं।

(जनचौक ब्यूरो)

Leave a Reply